अपनी आध्यात्मिक सक्ति जागृत करे।🌻🌼

सबसे पहले तो मुझ जैसा पापी अभागा सिस्य का उन गुरुदेव के चरणों में  सादर प्रणाम ,उन देवाधिदेव महादेव को कोटि कोटि नमस्कार ।मैं खुद को अहम् ब्रह्मास्मि मानते हुए भी उन्हें अपने अन्दर ही विराजमान मानता हु।जय हो समस्त दिसाओं चराचर जंतु वनस्पति  की जिनमे उस सक्ति स्वरुप का वास है।

अब मैं पते की बात पे आता हु दरअसल में देखा जाये तो आज सिर्फ इंसानियत का वास्ता देकर पूरी मानवता का गला घोटा जा रहा है आखिर क्यु हम सब इस मानव जाती सहित समस्त प्राणियो की रच्छा पे ध्यान नहीं दे रहे है? क्यु आज दुनिया पैसे के पीछे पागल हुए जा रही है वो पैसे के लिए कुछ भी करने को तैयार हो रही है,रे दुनिया मत भूल की जिसे तूने पैसे समझ कर अपनी जिंदगी स्वर्ग बनाने की फ़िराक़ में है दरअसल में वो नरक से कम नहीं।तो आखिर इस मानवता की रच्छा कौन करेगा क्या भगवान खुद आयेंगे और हम सब उनके भरोसे तब तक बैठे रहेंगे,आखिर ये हर फिल्ड में अंतर की दिवार किस तरह गिरेगी अमीर गरीब उच्च नीच लंबा नाटा सुन्दर बदसूरत सीधा टेढ़ा मेहनती कर्महीन इत्यादि आखिर ये अंतराल कहा समाप्त होगी ? सारे ग्रंथो सास्त्रो की बाते पूरी तरह लागु क्यु नहीं  होती अजीब समस्या है खास कर अपने देस भारत को जब देखता हु तो दिल रोता है की मैंने इतनी बड़ी भूल कैसे करदी वो भी जान बुझ कर ,एक 5 साल् की बच्ची का रेप हो जाता है और हम सब कुछ नहीं कर पा रहे है।तो दोस्तों अब इंतजार ख़त्म आज से आदित्य युग(आर्यपुत्र) सुरु और कलयुग ख़त्म बस आपलोगो का साथ चाहिए बस एक विकल्प बचा है जो पूरी मानव जाती को इस विनास से बचा सकती है ये प्रक्रिया क्या है आगे के लेख में लिखूंगा ,रिप्लाई जरूर कीजियेगा क्युकी conclusion तो बाकि है।।

जय गुरुदेव